काश – शिशिर मधुकर

काश ठंडी पवन सी तुम मेरे जीवन में आ जातीं
घने पीपल की छाया बन मन के आँगन में छा जातीं

अदा हँस हँस के जो तुमने मुझे अपनी दिखाई थीं
काश वो वक्त्त रहते दिल को मेरे सारी भा जातीं

तेरी आवाज़ सुन के चैन कितना मुझको मिलता है
काश पावन मिलन के गीत तुम ये पहले गा जातीं

दीवारों को तुम्हीं ने एक दिन आ कर गिराया था
काश अवरोध सारे वक़्त रहते तुम ये ढा जातीं

ये ग़म मधुकर के जीवन में दोबारा फिर नहीं आते
काश डर के ज़माने से मुझसे तुम दूर ना जातीं

शिशिर मधुकर

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    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/01/2019

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