तेरी मुहब्बत – शिशिर मधुकर

मुझे तेरी मुहब्बत ने ही बस जीना सिखाया है
जाम उल्फ़त का हौले हौले से पीना सिखाया है

मैंने तो ज़िंदगी में आस रखना छोड़ डाला था
तेरी बातों ने ही मुझको ख्वाब सीना सिखाया है

रंग चूड़ी में ना हो तो हाथ भी सज नहीं पाते
तूने इस काँच में मुझको भरना मीना सिखाया है

कहाँ तो ग़मज़दा माहौल ने हर वक्त घेरा था
बनाना ही तूने मुझको इसे भीना सिखाया है

ठोकरों ने ज़माने की मुझे पत्थर फ़कत समझा
तूने मधुकर कद्र गैरों से पर ले लीना सिखाया है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/02/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/02/2019

Leave a Reply