कैसे कहूँ – शिशिर मधुकर

ज़रा सा होश मिलता है याद बस तेरी आती है
मेरी धड़कन जवां हो के मिलन के गीत गाती है

मुझे वो बाँहों में भर के तेरा खुद में समां लेना
तेरी खुशबू मेरी हर सांस में महके ही जाती है

मेरा गर बस चले दिन रात मैं केवल सुनूं तुझको
तेरी आवाज़ कानों को मेरे इतनी सुहाती है

उसे कुछ ना ख़बर है तू बसा है दिल में इस मेरे
सखी वो चुपके चुपके जब तेरे किस्से सुनाती है

कोई तो बात है तुझ में तुझे कैसे कहूँ मधुकर
यूँ ही हर शख्स को गोरी नहीं दिल में बिठाती है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/01/2019

Leave a Reply