दर्द ए दिल

दर्द ए दिल का क्या हाल बया करू,
बस इस दुनिया से छुपाता रहता हूँ।
अंदर से जख्म हरे हैं अभी भी,
बाहर से यू ही मुस्कुराता रहता हूँ।
भूल नहीं पाया अपने अतीत को,
फिर भी इस दिल को समझाता रहता हूँ।
“अलग” क्या बताऊअब हाल अपना
बस जिंदगी यूही काटता रहता हूँ।

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