चुनावी प्रार्थना 🙏

न लगे अंकुश कोई , जनता के इस प्यार पर
हे  प्रभु  राहत देना, इस  बार  के त्यौहार पर
– – – – –
मन में दृढ़ता को लिये, कुछ करने की आशा जगे
सोये  मन मे फिर से ही, एक बार अभिलाषा जगे
अपनो से जो गए भटक, उनको भी तो रक्षा मिले
तन ढका  कपड़ों  से हो, भरपूर फिर शिक्षा मिले
धरती  पुत्र  की भुजा का, श्रम  भी सूखा  न  रहे
पेट   की   तृष्णा  मिटे, कोई   भी  भूखा  न  रहे
घर  की बहनों माँओं की, रक्षा पे भी तो बात हो
चीख  से  घुटती  हुई,  फिर न किसी की रात हो
निर्णय  हो अब से  सभी, ईमान  के  आधार पर
हे प्रभु राहत ……
– – – – –
जो  खड़ा  है  देश  की, सीमा पे  रक्षा  के लिए
जान दाव  पर लगा, हम सब की इच्छा के लिए
उस  वीर के  परिवार का, आधा सपन पूरा करें
फर्ज  बनता है हमारा, सब को  हम अपना करें
शेर  को  शासन  मिले, अन्दर भरी माँ की दया
पेड़  की  छाया  मिले, युवा पीढ़ी को फल नया
देश   के  न्याय  से,  लोगों  में  भरा  संतोष  हो
दोषी  को  सजा  मिले, सम्मान  जो  निर्दोष हो
न करें अधिकार, कोई भी, किसी अधिकार पर
हे प्रभु राहत……

कवि -मनुराज वार्ष्णेय 

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/02/2019

Leave a Reply