एहसास – शिशिर मधुकर

इम्तिहां ले रही है ज़िन्दगी पर मैं भी ना हारी हूँ
मेरी ताकत बने हो तुम ज्यों मैं शक्ति तुम्हारी हूँ

तू मेरे पास है हर पल मुझको एहसास होता है
मुझे भी है गुमां अब तो लगूं मैं तुझको प्यारी हूँ

बने हो नींव का पत्थर मुहब्बत के महल का तुम
तुम्हारे दम पे मैं इतरा रही इसकी ऊँची अटारी हूँ

मेरे इस रूप के चर्चे तो बस तेरी बदौलत हैं
मैं तो साड़ी के घूंघट की फ़कत पतली किनारी हूँ

ज्यों मेरे मान की खातिर फना तू हो गया मधुकर
कभी ना टूटने वाली मैं भी असली वो यारी हूँ

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/01/2019

Leave a Reply