गज़ल

आँधियों से व्यथित हो गया दीप है |

वायु उत्पात में अब फँसा दीप है ||

 

न्याय का देवता आज कायर बना |

उच्चतम न्याय का बुझ रहा दीप है ||

 

आस विश्वास सब कुछ लगा टूटने |

रोशनी को निगलने लगा दीप है ||

 

दीप से सुंदरी का दुपट्टा जला |

बन रहा फिर भी’ कितना भला दीप है ||

 

दीप से ही हजारों पतंगे जले |

अब अतिथि आरती का बना दीप है ||

 

आज तक थी सुहागन निशा चाँद से |

चाँद का शव जलाने चला दीप है ||

 

शिव का आदेश सुन दीप रोने लगा |

दास शमशान का बन जला दीप है ||

 

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

95825100 29

 

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/01/2019
    • acharya shivprakash awasthi Acharya Shivprakash Awasthi 19/01/2019

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