ग़मों की ज़िन्दगी में तो कभी मकसद नहीं होते…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

ग़मों की ज़िन्दगी में तो कभी मकसद नहीं होते…
अगर जो ठान ले तो ग़म ख़ुशी सरहद नहीं होते…

दफ़न नफरत हमेशा ही हुई है वक़्त-ए-दरिया में….
मगर इस इश्क़ के हरगिज़ कभी कम कद नहीं होते….

छुपा कर रख लिया खंजर बड़े इत्मिनान से मैंने….
जुबां के अस्त्र शस्त्र भी तो कभी बेहद नहीं होते…

कभी मैं भी चला आता कदे तेरे को सुन साकी…
खुदा के नूर मेरी रूह की गर हद नहीं होते…

ज़माना लाख चाहे भी बुरा ‘चन्दर’ नहीं बनता….
महब्बत करने वाले तो कभी भी बद नहीं होते….
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/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/01/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 18/01/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 18/01/2019

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