कैसा शिकवा – शिशिर मधुकर

कैसा शिकवा करें तुझसे जो टूटी अपनी यारी है
मैं तो वो जाम हूँ जिसमें बसी ना अब खुमारी है

मुझे मालूम है हर शख्स तो इस पल में जीएगा
क्या करें गर किसी ने कल तेरी किस्मत संवारी है

कभी गर इश्क था तुमको तो क्या अब जान ही लेंगे
मुझे एहसान है ये होती फ़कत कुछ की बीमारी है

तुम्हें इस गाय में अब कोई माता नहीं दिखती
उमर गुजरी है इसकी भी ये न होती दुधारी है

किसी से प्यार बाँटा था कोई ना सच बताएगा
अगर कुछ वक्त ऐसा है कि वो मधुकर भिखारी है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/01/2019

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