मरहम – शिशिर मधुकर

क्या करें साथ का ऐसे बात गर कर नहीं सकते
किसी टूटी सी गगरी में आब तो भर नहीं सकते

शाख उस पेड़ की सूखी जो मेरे घर में आई है
फूल कितना मनाओ पर वहाँ से झर नहीं सकते

ये कांटे ही फ़कत इस पेड़ की असली निशानी हैं
लाख कोशिश करो पर ये कभी भी मर नहीं सकते

माँगते रह गए सबसे मुहब्बत ना मिली जिनको
मौत के बाद भी वो तो जहाँ से तर नहीं सकते

मुझे मिलता नहीं मरहम किसी के प्रेम का जब तक
टोटके ये सभी वो पीर मधुकर हर नहीं सकते

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/01/2019

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