पुनीता – शिशिर मधुकर

ज़रा सा चैन पाने को ये मय इंसान पीता है
पिला के प्रेम रस देखो मैंने तुमको जीता है

मिलन की कोशिशें तेरी नहीं बेकार जाएंगी
जवानी का समय पूरा अभी थोड़े ही बीता है

मुकद्दर से लड़े पर अंत में बस ये समझ पाए
कोई तो पा गया खुशियां कहीं पे हाथ रीता है

जहाँ श्रद्धा नहीं उमडे फ़कत तकरार हावी हो
मुहब्बत की वहाँ हर बात में लगता पलीता है

कोई भी गर मुहब्बत को जहाँ में पाप समझेगा
उसे तुम बोल दो मधुकर ये धारा तो पुनीता है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/01/2019

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