ख़फा क्यों है – डी के निवातिया

ख़फा

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वो शख्स मुझसे इतना ख़फा क्यों है
बेवफाई में ढूंढता वो वफ़ा क्यों है !!

कभी चाहत, कभी नफरत-ऐ-अदा
मिज़ाज़ उनका दो-तरफा क्यों है !!

इक – दो बार होता तो हम मान लेते
मगर सलूक ऐसा कई मर्तबा क्यों है !!

जरूर कोई तो बात रही होगी मुझमें
वरना मेरे संग उनकी अब्ना क्यों है !!

अगर मुहब्बत पे सनम को रहा एतबार है
फिर “धर्म” के साथ चला ये गंजीफा क्यों है !!

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डी के निवातिया

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बिन बहर की नज़्म
काफिया – आ
रदीफ़ – क्यों है
!

अब्ना= सन्धि,सहमति,
गंजीफा = ताश की तरह का एक खेल जिसमें पत्ते गोल होते हैं और संख्या में 96 रहते हैं।

 

11 Comments

  1. Abhishek Rajhans 10/01/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2019
  2. davendra87 davendra87 10/01/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2019
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/01/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2019
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/01/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/01/2019
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 17/01/2019
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/01/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/01/2019

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