तूँ चाँद है फलक़ का

तूँ चाँद है फलक़ का,मैं मिट्टी का बादशाह
तूँ ख्वाहिश है दिलों की,मैं यूँ ही बे-वजह

तूँ हुस्न है चमन का,मैं ख्वाहिश-ए-वीरान
तूँ आगाज़-ए-आसमान है,मैं बुझता कारवाँ

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/01/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/01/2019

Leave a Reply