अधूरा सफर

जाने उससे मेरा क्या है जुड़ा
कैसा रिश्ता ,कैसा बंधन
जानता हूँ मैं
मैं ना उसके सफर का हिस्सा हूँ
ना उसकी मंजिल हो सकता हूँ
फिर भी उसके साथ चलना चाहता हूँ
उसके पास न होने से बिखरने लगा हूँ
उसके न होने के डर से डरने लगा हूँ

मैं जानता हूँ
वो मुझसे दूर चली जायेगी
और मैं उसे रोक नहीं पाऊंगा
जो भी है दिल में है मेरे उसके लिए
उससे कभी कह नहीं पाऊंगा
वो कल किसी और के नाम की
मेहंदी हाथों में रचाएगी
और मैं उसे दुल्हन के लिबास में
बस देखता रह जाऊँगा

वो बस मेरी अधूरी ज़िन्दगी का
हिस्सा बन कर रह जाएगी
मैं उसकी यादों में
बस कोई किस्सा बन कर रह जाऊंगा
वो अपनी खुशियां ढूंढने कहीं औऱ जाएगी
मैं अपने दर्द को अपने भीतर ही समेट लूंगा
उसे कभी मेरी कोई खबर नही मिलेगी
ना कभी मैं उसका पता ढूंढूंगा
ये सफर अधूरा ही रहेगा मेरा
और कहानी मेरी, कभी पूरी नहीं होगी–अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. davendra87 davendra87 09/01/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/01/2019
    • Abhishek Rajhans 10/01/2019
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/01/2019

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