हो दिल की दुआओं में

कभी आँखों के खालीपन, कभी दिल की दुआओं में
यकीनन  दूर  हो  मुझसे, या हो  दिल  की  पनाहों में
भले  रूठे  हो  तुम  हमसे, मगर  ऐहसास  बाकी   है
इन्ही  ऐहसास  से टिकते  रहे, मोहब्बत  की  राहों में

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

2 Comments

  1. davendra87 davendra87 09/01/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/01/2019

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