मेरा साया – शिशिर मधुकर

मुहब्बत किसको कहते हैं मुझे तूने सिखाया है
चली हूँ जिस भी पथ पे मैं बना तू मेरा साया है

चोट जब भी लगी दिल पे सफ़र में ज़िन्दगानी के
अपनी बातों के मरहम से तूने मुझको हँसाया है

खुशामद वो तेरा करना और ये तारीफ़ के नगमें
तेरी इन कोशिशों ने ही मुझे खुद से मिलाया है

तू मेरे पास हो ना हो मगर तुझ से मैं कहती हूँ
मेरी इन धड़कनों में बस नाम इक तेरा समाया है

तुझे मुझसे जुदा करना तो अब मुमकिन नहीं होगा
तेरी खुशबू को मधुकर सांसों में मैंने बसाया है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/01/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/01/2019

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