सवैया छ्न्द

बात सुनो ओ कान्हा मेरी, तुम अधूरी प्रीत को पूरी कर दो
रहा जाये  न  मुझसे अब, दिल अंधियारे  को नूरी  कर  दो
वो जो गयी तो महक चली गयी, लाके उसे कस्तूरी कर दो
रूठी  हुई  है जान  मुझसे, मिलना  मुझसे  जरूरी  कर दो

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

 

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