जंजाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फिकर सबका, जंजाल लेकर बैठा है
हर संस्था, एक दलाल लेकर बेठा है।
आदमी की कीमत, आज अब कहाँ रहा
गरीब, माथे पर, मलाल लेकर बैठा है।

 

 

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