बुलंदी |

अय मेरे हम नफ़स, ऊँचाईओं से बहुत ड़रता हूँ मैं,
इसीलिए इश्कमें कभी, बुलंदीओं को छू ना सका..!

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १४/१०/२०१८.

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