पीछे मुड़कर कभी न देखो

पीछे मुड़कर कभी न देखो

…आनन्द विश्वास

पीछे  मुड़कर कभी न देखो, आगे  ही  तुम  बढ़ते  जाना,

उज्ज्वल ‘कल’ है तुम्हें बनाना,वर्तमान ना व्यर्थ गँवाना।

संधर्ष आज  तुमको करना है,

मेहनत  में  तुमको खपना है।

दिन और रात  तुम्हारे अपने,

कठिन  परिश्रम   में तपना है।

फौलादी  आशाऐं  लेकर, तुम लक्ष्य प्राप्ति करते जाना,

पीछे  मुड़कर कभी न देखो, आगे ही तुम बढ़ते जाना।

इक-इक पल है बहुत कीमती,

गया समय  वापस  ना आता।

रहते  समय  न  जागे  तुम तो,

जीवन  भर   रोना  रह  जाता।

सत्यवचन सबको खलता है,मुश्किल है सच को सुन पाना,

पीछे  मुड़कर  कभी  न  देखो, आगे  ही  तुम  बढ़ते जाना।

बीहड़  बीयावान   डगर  पर,

कदम-कदम पर शूल मिलेंगे।

इस  छलिया  माया नगरी में,

अपने  ही  प्रतिकूल  मिलेंगे।

गैरों की तो बात छोड़ दो, अपनों से मुश्किल बच पाना,

पीछे  मुड़कर कभी न देखो, आगे  ही तुम  बढ़ते जाना।

झंझावाती  प्रबल  पवन  हो,

तुमको नहीं  कहीं रुकना है।

बाधाऐं  हों  सिर  पर  हावी,

फिर भी नहीं तुम्हें झुकना है।

मन में दृढ़  विश्वास  लिए, संकल्प  सिद्ध  करते  जाना।

पीछे  मुड़कर कभी न देखो, आगे ही  तुम बढ़ते जाना।

नदियाँ  कब  पीछे  मुड़ती हैं,

कल-कल करती आगे बढ़तीं।

समय-चक्र आगे  ही बढ़ता,

घड़ियाँ  कब  उल्टी चलतीं।

पल-पल बदल रहा है सब कुछ, संग समय के चलते जाना।

पीछे  मुड़कर  कभी  न  देखो, आगे  ही  तुम  बढ़ते जाना।

***

…आनन्द विश्वास

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/01/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/01/2019

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