मिलन की आस – शिशिर मधुकर

कोई गर दिल की गहराई से तुमको प्यार करता है
तुम्हारे मान की खातिर वो कुछ भी कर गुजरता है

नाज़ छवियां सनम की जो बना के दिल में रक्खेगा
रूप शृंगार के बिन भी सदा उसका निखरता है

नाव कैसी भी हो केवट की देखो शान है जग में
उसी से घर चलाता है पार नदिया उतरता है

तलाशा जब भी मैंने साथिया कोई यहाँ अपना
जानेमन जान ले बस अक्स एक तेरा उभरता है

मिलन की आस हो मन में अगर सिय राम के जैसी
राह आसां बनाने मधुकर समुन्दर भी ठहरता है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2019

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