क़िस्से गुलनार के

पीपल के पके पात
पंछी पतझार के,
थोड़ी ऋतु और अभी बाक़ी है
उड़ने दो छंद ये बहार के ।

फूल-फूल अगवानी
शूल, खिंची पेशानी
मौसम का जाने कब तक है–
दाना-पानी ।

पानी के पीछे हैं
क़िस्से गुलनार के !
थोड़ी लय और अभी बाक़ी है
उड़ने दो गीत नदि पार के ।

भोरहरे की लाली
माँज रहा है माली
फूलों की आँखों में
है पूजा की थाली
थाली के फल-फूल
रिश्ते अंगार के,
थोड़ी-सी बर्फ़ अभी बाक़ी है
गलने दो, दो पहर खुमार के ।

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