असर – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दूर रह कर भी कोई मुझसे निभाता है
वो साथी हर घड़ी मुझको तभी तो याद आता है

उसे एहसास है मैं जख्मों को सीने में रखता हूँ
मेरी हर पीर को वो प्यार से अपने मिटाता है

खुदी को भूल कर जब वो मेहरबां होता है मुझ पर
दौलतें हुस्न की अपनी सभी खुल कर लुटाता है

कभी खुद को मेरी हस्ती से उसने दूर ना समझा
तभी वो ख्वाबों में आकर मेरी नीदें चुराता है

चमक मधुकर के चेहरे पे फ़कत यूँ ही नहीं आती
असर ऐसा ही होता है वो जब मुझको बुलाता है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 31/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2019
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2019

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