वादा – शिशिर मधुकर

आज मेरी मुहब्बत की तुम्हें ना कद्र ज्यादा है
लगे सब कुछ भुलाने का फ़कत तेरा इरादा है

अगर चाहत पले मन में राह तो बन ही जाएगी
फिर क्यों मजबूरियों का तू यहाँ ओढे लबादा है

बोझ तन्हाइयों का लो मैं अपने सर पे ले लूँगा
मैंने ग़म ज़िन्दगी में ना कभी औरों पे लादा है

जब दिल दिया मैंने ना कुछ सोचा ना कुछ परखा
मुझे जिसने लुभाया वो तो तेरा बस रूप सादा है

दहशतें छोड़ दो सारी मन पे ना बोझ तुम रक्खो
कभी रुसवाई ना होगी यही मधुकर का वादा है

शिशिर मधुकर

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