गिरेबां में कभी अपने भी

असलियत सिर्फ, सामने देखने से, नहीं पता चलती,
गिरेबां में कभी अपने भी, झांककर देखिये जनाब,

सवाल दर सवाल कराते रहना, नहीं है, कोई खासियत,
सवालों के कभी, हमारे भी, जबाब दीजिए जनाब,

माना, करोड़ों को आपने पहनाई है टोपी,
करोड़ों के खातिर, आप भी, एक बार, टोपी पहनें जनाब,

बहुत हुईं आपकी, ‘मन की बातें’,
बेमन ही सही, अब हमारे, ‘मन की बात’ भी सुनिए जनाब,

‘नवाज’ के गले लगने, अम्मी को शॉल ओढ़ाने का, दिखावा तो बहुत हुआ,
देश में भी तो किसी, अम्मीं के लाल से, एक बार, गले मिलिए जनाब,

अरुण कान्त शुक्ला
23/12/2018

 

3 Comments

  1. HIMANSHU KUMAR PAL 'DILER' 25/12/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 26/12/2018
  3. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 27/12/2018

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