गर तू नज़रों से पिला जम के पिएँगे साक़ी-SALIMRAZA REWA

गर तू नज़रों से पिला जम के पिएँगे साक़ी
रहने देंगे नहीं प्याले में कोई मय बाक़ी

जाम पे जाम चले सुब्ह से शाम चले
तेरा भी नाम चले मेरा भी काम चले
ज़ख़्म खाने दे मुझे ग़म भुलाने दे मुझे
अब तो जीने दे मुझे जाम पीने दे मुझे
साथ तेरा जो रहे ग़म कहाँ रहे बाक़ी

साक़िया पूंछो ज़रा क्या है पीने का मज़ा
बिन पिए रह न सके दर्द ओ ग़म सह ना सके
लड़खड़ाते हैं क़दम होश में आते है हम
कहीं छूटे ना सनम कहीं टूटे न क़सम
तेरे आँखों सा नशा और कहाँ है साक़ी

एक मैखाना रहे एक पैमाना रहे
एक दीवानी रहे एक दीवाना रहे
हाथो से जाम पिला आंखो से जाम पिला
होटो से जाम पिला साँसों से जाम पिला
आज तू इतनी पिला होश रहे ना बाक़ी

उधर महबूब मेरा इधर मैख़ाना है
छोड़ूँ महबूब नहीं मयक़दा जाना है
यार छोड़ा न गया जाम तोड़ा न गया
ऐ ‘रज़ा’ तू ही बता हक़ करें किसका अदा
जाम धड़कन है मेरी होश मेरा है साक़ी
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सलीम रज़ा रीवा

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/12/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/12/2018

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