जज़बात ।

मेरे जज़बात समझने को, बस इक आलिम मिले…!
मेरे हर ग़म और खुशी में फिर, वो शामिल मिले…!
इस के सिवा, और तो क्या मागुं रब मैं तुम से…!
बस इतना कर, हर तरह से, वो काबिल मिले…!

मार्कण्ड दवे । दिनांकः -११-१०-२०१८.

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/12/2018
    • Markand Dave Markand Dave 25/12/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/12/2018

Leave a Reply