लब्जों को थोड़ा दबा कर रखना

अपने दिल मे किसी नये को बता कर रखना
अपने लब्जों को भी थोड़ा दबा कर रखना
भले जुल्फों के नीचे किसी और को बिठा लो
मगर उनसे हमारी बातें छुपा कर रखना

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

 

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