लाचार – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

इतना है लाचार बेचारा क्या करेगा
कोई करे विचार बेचारा क्या करेगा।

कोशिश करके हारा है जालिम जमाने से
फिर भी था तैयार बेचारा क्या करेगा।

मंजिल पास पड़ी थी फिर भी वो हार गया
ऐसा हुआ बीमार बेचारा क्या करेगा।

रब रूठे थे या किस्मत उसकी खोटी थी
बह गयी उल्टी धार बेचारा क्या करेगा।

धर्म पर अपने फिर भी वो इतना साथ रहा
गया जीवन से हार बेचारा क्या करेगा।

जी हुजूरी करने की आदत नहीं उसकी
पाप नहीं लिया उधार बेचारा क्या करेगा।

इक ऐसा इंसान इतना सीधा – सादा था
लड़कर भी गया हार बेचारा क्या करेगा।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/12/2018

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