है बुलबुला रंगों का

है इक बुलबुला

यह ज़िन्दगी

तरह २ के रंग

भी हैं शामिल

फूला रहता है

बड़े गुमानों में यह

बसी रहती है

इसमें पूरी कायनात

अपनी ही दुनिया में हो मगन

भूले रहते है हम

इसके फटने का राज़

पाने पर बुलन्दियाँ

इन्सान करता है नाज़

इसकी ख़ातिर भटकता है

यहाँ वहॉ जाने कहॉ

कुछ भी करने से

नहीं आता यह बाज़

पानी और हवा से भरा

मचलता रहता है हर पल

कई रंगों के सपने भी संजोता है

दुनिया की बात तो एक तरफ़

कभी ख़ुद को भी भूल जाता है

मगर एक दिन एैसा भी आता है

हवा की मनिंद बिखर है

आकार निराकार हो जाता है

दिखता था जो रंगो से भरपूर

जाने कहॉ सिमिट जाता है

बुलबुलों सी जि़न्दगी

मोहताज है पलों की

पूरा होते ही समय

हवा हो बिखर जाता है

यही है ज़िन्दगी,

जैसे बुलबुला हो कोई

मान लेते है इसे जीवन हम

इसी भ्रम में

जीवन गुज़र जाता है

यही है कहानी

छोटी सी जि़न्दगानी

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/12/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 19/12/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/12/2018
  4. kiran kapur gulati Kiran Kapur gulati 20/12/2018

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