“तु आगे बढता चल…”

कर तु हालात से मुकाबला
चाहे हो कितनी भी बला
तु आगे बढता चल-तु आगे बढता चल…

बांधे सीमा तुझको गर
रुकना ना कभी भी हारकर
तु दौडता चल-तु आगे बढता चल…

हाथों को थामकर उनके
पैरों मे व्यथा हो जिनके
साथ उनको लेता चल-तु आगे बढता चल…

जाना है तुझको हद के परे
जहाँ पर्वत हो शीश झुकाएँ खडे
हवा का झोका बना चल-तु आगे बढता चल…

हो कामयाबी के शीखर कदमों तले
चाहे हो मुश्किल कितनी भी भले
दृढ़ तेरा हो निश्चय अटल-तु आगे बढता चल…

तु खुशी को नही, खुशी तुझे पाने को तरसे
तु बुंद मांगे पानी की, तुझपर रिमझीम बारीश बरसे
हर परिस्थिती मे तु संभल-तु आगे बढता चल…

मिले खुदा की रहमत तुझको
मिले खुशी तुझे, चाहे गम कितने ही मिले मुझको
तु मुस्कराता रहे हरपल-तु आगे बढता चल…

सपनो के जहान मे उसपार
हो सब तेरा मनचाहा और तु हो वहाँका राजकुमार
अपने मिठे ख्वाब से जहाँ बुनता चल-तु आगे बढता चल…

हंसराज केरेकार “राजहंस”

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/12/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/12/2018

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