रात तन्हाई की – शिशिर मधुकर

चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा है
नज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो,आखिर, उकेरा है

मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होता
मगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा है

रात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बी
ना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा है

खुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानी
मेरे दिल में आज देखो, गमों का, बस बसेरा है

सफ़र पूरा किया सबने, इन्हीं राहों पे चल चल के
मगर मधुकर देख तुझको, मिला, कातिल लुटेरा है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  2. sarvajit singh sarvajit singh 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/12/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/12/2018
  5. Ranjeet sinha 14/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/12/2018

Leave a Reply