ये बारिश प्रेम की – शिशिर मधुकर

छवि एक दूजे की दिल में, जहाँ में जब समाती है
तभी बदनों को आपस में, महक फूलों की आती है

अगर है मैल इस दिल में, हर इक रिश्ता हैं बेमानी
ना जाने क्यों मगर दुनिया यहाँ, इनको निभाती है

एक उल्फ़त के प्यासे को, जहाँ मिलती है ये दौलत
दरो दीवार उस घर की, उसे हर पल बुलाती है

बड़ा ऊँचा शज़र है जो, उसकी फितरत ज़रा देखो
ये बारिश प्रेम की उसको भी, धरती पे झुकाती है

जो खुद को छोड़ दे मधुकर, खुला नदिया के पानी में
तभी बाहों में भर के धार संग, उसको बहाती है

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  3. raja 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/12/2018

Leave a Reply