मुक्तक

आज कुछ तो छुपती बात है, बेचैन क्यों ये रात है
न  चाँद  है  न  तारे  है ,  मायूस  दिखते  सारे   है
प्यार  की  परिभाषा  में, आज  ये  बदलाव आया
फिर  प्रेमी युगलों के बीच, आज सारा गाँव आया

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/12/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/12/2018