अंत काल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कोई ना होगा संगी साथी
जब अंत काल आ जायेगा।
कोई साथ ना देगा तुमको
तुम देख देख पछतायेगा।।

मन में जो गुमान था तेरा
सब चकनाचूर हो जायेगा।
तेरा तुमको साथ नहीं देगा
इतना मजबूर हो जायेगा।।

धन दौलत चिढ़ायेंगे सब
अपना वो रंग दिखायेगा।
नहीं चलेगा रोब तुम्हारा
वह अपना रंग जमायेगा।।

दुनिया की है यही कहानी
सब तेरा – मेरा छुट जायेगा।
इतना सुंदर छोड़ के पिंजरा
प्राण, पंक्षी बन उड़ जायेगा।।

लालच काहे इतना मन में
जीवन को वह उलझायेगा।
प्रेम से जीना रहना सीखो
नहीं तो तुमको तड़पायेगा।।

सच्चा कर्मठ साथी बनना
तो ही सुकून मिल पायेगा।
सत्य अहिंसा मार्ग हो तेरा
भव सागर पार होजायेगा।।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/12/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 12/12/2018

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