शायर

एक दिन शायर मुझ को बनना |
जैसे दिल की बात बताई ||
क्या होगा शायर ही बनकर |
आवाज़ पिता जी की आयी ||

नाम, शौहरत सब कुछ इसमें |
हिम्मत कर के बात बढ़ाई ||
कल्पनाओं का दौर इसमें |
शब्द खेल की बात सुनाई ||

सहसा मेरी बातें सुन कर |
पिता जी को इक हसीं आयी ||
मोबाइल, टीवी पर व्यस्त |
दुनिया दीवारों में घिर आयी ||

ख़बर बिकतीं नहीं देखो तुम |
जब तक सनसनी न बन जाये ||
बढ़िया गीत ग़ज़ल ग़ुम देखो |
लचरता की बात अब आये ||

सच कहना मुश्किल में पड़ना |
ठगों ने मिल दुनिया डराई ||
अंधविश्वाश लोगो ने बना |
ख़ुद की कमाई है लुटाई ||

पिता जी बातें सुनकर आज |
मेरी आंखे भर है आयी ||
सोच रहा हूँ मैं क्यों ऐसी |
शायर वाली चाह जगाई ||

मनिंदर सिंह “मनी”

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/12/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/12/2018

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