तितली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

तितली तुम बड़ी सयानी हो
पास आती पर उड़ जाती हो।
मन मोहक तेरा रंग निराला
हमें छोड़ फूलों पर जाती हो।।

मादक मधु रस तुम लेती हो
बदले में नहीं कुछ देती हो।
कली कली हर फूलों पर तुम
क्यों देख देख इतराती हो।।

फूलों के उन पंखुड़ियों पर
तुम चुपके से बैठ जाती हो।
उन कोमल कोमल हाथों से
मुख पुष्परज ले जाती हो।।

हर फूलों पर जाती हो तुम
मनचली मन मौजी हो तुम।
रंग उमंग की तुम हो रानी
लगती हो तुम बड़ी सयानी।।

बच्चे को तुम खूब चिढ़ाती
अपनी करतब खूब दिखाती।
तुम उनके हो नैनो के प्यारे
तुम जीत गयी सब बच्चे हारे।।

3 Comments

  1. arun kumar jha arun kumar jha 09/12/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/12/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 10/12/2018

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