ग़मो से यारी

इस भाग दौड़ की ज़िन्दगी से
बहुत थक चुकी हूँ मैं
रोज़ करती हूँ मैं
एक जंग की तैयारी
सुबह उठते ही होती है
ग़मों से यारी
बड़ी मुश्किल से वक़्त निकाल
लिखती हूँ अपनी जज़्बात
कोई पढ़ ले कभी इसे
देने पड़ते है इसके जबाब
किसी का किया किसी को दिखता नहीं
किसी ने किया दो दिन होता उसका नाम
कानून में हस्ति भी उसी की होती है
जिसकी जेब नोटों से भरी होती है ।

6 Comments

  1. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 03/12/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/12/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/12/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/12/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/12/2018

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