सबसे छोटा क़ाफ़िया, और सबसे लंबी रदीफ़ की ग़ज़ल – SALIM RAZA REWA

जब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
लब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
oo
तुम मेरे साथ हो,चांदनी रात हो,होंट की बात हो,ज़ुल्फ़ की बात हो
तब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
oo
हम नहीं चाँद तारे ये काली घटा गूंचा ओ गुल ये बुलबुल ये महकी फिज़ा
सब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
oo
हम गुनहगार है, हम सियह कार हैं, फिर भी रहमो करम पे यकी है हमें
जब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
oo
ऐ रज़ा दर–बदर हम भटकते रहे प्यार क्या, प्यार का इक निशाँ ना मिला
अब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी
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सलीम रज़ा रीवा

8 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 03/12/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/12/2018
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 04/12/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/12/2018
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 05/12/2018
  5. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 05/12/2018
  6. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 06/12/2018

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