चंद खुशिओं का भी ख़ज़ाना है- SALIM RAZA REWA

शाम आना है सुब्ह जाना है
दिल सितारों से क्या लगाना है
oo
दिल ये कहता है तुम चले आओ
आज मौसम बड़ा सुहाना है
oo
प्यार,उल्फ़त,वफ़ा,मुहब्बत, सब
ये तो जीने का इक बहाना है
oo
सच कहाँ होती ख़्वाब की बातें
ख़्वाब होता मगर सुहाना है
oo
ग़म,फ़क़त है नहीं मेरे संग में
चंद खुशिओं का भी ख़ज़ाना है
oo
ऐ ‘रज़ा’ हौसला रहे कायम
चोट खाकर भी मुस्कुराना है
__________________________

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/12/2018
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 03/12/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
  4. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 03/12/2018

Leave a Reply