अपनापन – शिशिर मधुकर

कोई भी बात जब तुमसे मैं अपनेपन में कहता हूँ
सोच के बस भला तेरा मन में खुश होता रहता हूँ

मेरी हर बात को तुम भी जो झट से मान लेती हो
मुझे लगता हैं यूँ कि मैं तेरी नस नस में बहता हूँ

जुदाई यूँ तो हर इंसान के दिल को दुखाती है
तेरी आवाज़ सुनने को मैं तो ग़म ये भी सहता हूँ

बर्फ सी जम गईं यादें सभी मेरे पत्थर से सीने पे
बोझ बढ़ जाता है इनका टूट तब मैं भी ढहता हूँ

वक्त को ना समझ पाया है इंसान लाख चाहा पर
फिर से उसका करम होगा मन में मैं ये ही कहता हूँ

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2018

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