रब ही लिखता है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिससे हो जाए खुदा बस उसमें दिखता है
बनाने से बना हैं कब ये रिश्ता रब ही लिखता है

खरीदा हैं जहाँ उसने मगर ना प्रीत मिल पाई
ज़रा कोई उसे कह दे ये जज्बा थोड़े ही बिकता है

गमों को सह सके जो भी वो ही असली खिलाड़ी है
इस खेल में वरना हर एक लम्बा ना टिकता है

मुहब्बत और जिम्मेदारी दोनों जीवन के पहलू हैं
यहाँ इंसान अक्सर ही दोनों पाटों में पिसता है

भले कुछ ना कहा उसने जुबां को सी लिया बरबस
सच तो मधुकर मगर तू देख उसके नैनॊं से रिसता है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 23/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/11/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2018

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