नज़दीक – शिशिर मधुकर

मैंने यूँ ही नहीं सब कुछ तेरे ऊपर लुटाया है
जहाँ को छोड़ के तूने मुझे मन में बिठाया है

बड़ी मुद्दत से खुद को अकेला पा रही हूँ मैं
एक तू ही फ़कत मेरे बड़ा नज़दीक आया है

तुझे मुझसे जुदा करना तो अब मुमकिन नहीं होगा
मेरी सांसों में तू कुछ इस कदर घुलकर समाया है

ज़माने ने दिखा के भय मुझको कमज़ोर कर डाला
एक तू ही है जिसने मेरा हर डर मिटाया है

बनाते रह गए सब राह कांटों की मेरी खातिर
मगर मधुकर ने मुझको फूलों पे केवल सुलाया है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2018

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