सताने लगे है – डी के निवातिया

सताने लगे है

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जब से हम काँटों को, गले से लगाने लगे है
लोग फूलों की चुभन से, हमे सताने लगे है !

दर्द से रिश्ता कुछ जब ख़ास-म-खास हुआ है
मर्ज़-ऐ इश्क में तब से सुधार आने लगे है !

असल मज़ा ज़िंदगी का तब से आने लगा
तन्हाई में गीत जब मिलन के गाने लगे है !

लोगो का कारवाँ हमारे पीछे पीछे चलने लगा
जब से हम मौत को खुद नज़दीक लाने लगे है !

जीते जी चैन से “धर्म” जीने दिया न मरने दिया
मरे हुए को रो-रोकर सब गले से लगाने लगे है !!!
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स्वरचित :- डी के निवातिया

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/11/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/02/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/02/2019

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