अंदाज़ ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

सब कुछ लुटा के प्यार से मुझको ही लूटा है
अंदाज़ ए मुहब्बत ये तेरा बिल्कुल अनूठा है

शीशा ए दिल में पहले तो तेरी एक छवि थी
छवियां अनेक उभरी जो ये टुकडों में टूटा है

एहसास है मुझको तू अब ना पास आएगा
सहारा मगर उमीदों का फिर भी ना छूटा है

कभी जान कर इंसान से गलती नहीं होती
फिर से तू समां सांसों में इतना क्यों रूठा है

किस किस से छुपाओगे तुम वो पल बहार के
जिसका गवाह मधुकर हर एक पता बूटा है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/11/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2018

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