बेचैनियां – शिशिर मधुकर

बेचैनियां घटती नहीं और दिल उदास है
दूर है मेरी ज़िंदगी अब आती ना पास है

मुद्दत हुईं आगोश में जो उसके सर रखा
आज भी छूटी नहीं मिलने की आस है

फूल कितने खिल रहे हैं यूँ तो हर तरफ़
सांसों की गंध उसकी पर सबसे खास है

बस एक साथ उसका मुझको कुबूल है
छवि कोई भी और तो आती ना रास है

कैसे कहूँ जो उसकी बाहों में मुझे मिला
बन गया मधुकर तभी तो उसका दास है

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/11/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/11/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/11/2018

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