पद्मश्री नारायण दास जी को मेरी श्रदांजलि

प्रेम पूरित वो हाथ,
और प्यारे से वो चरण।
आप चले प्रभु छोड़,
अब कौन देगा हमे शरण।
आप थे माता-पिता,
सबकुछ आपमे दिखता था।
सब का भाग्य हे नारायण,
तू अपने हाथ से लिखता था।
छह की उम्र में ही प्रभु,
वैराग्य आपने था धारा।
तन-मन और जीवन,
दुखियों की सेवा में था वारा।
गौ सेवा का संदेश दे,
भूखे को दो भोजन बताया था।
परोपकार है धर्म बड़ा,
प्रभु आपने ही समझाया था।
क्रंदन कर रही देखो तीनो वेणिया,
अब गुरु करेंगे देवलोक भ्रमण
आप चले प्रभु छोड़,
अब कौन देगा हमे शरण।
©कृष्ण सैनी(विराटनगर)

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/11/2018
  2. Krishan saini Krishan saini 19/11/2018

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