कौतूहल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कितनी बड़ी है दोस्ती, कितना बड़ा है प्यार
जीवन पर ही चल रहा, इतना बड़ा संसार।
कौतूहल में पड़ गये, निकलो बाहर आज
सत्य अहिंसा प्रेम का, मन में कर संचार।

मुखिया जी तनी कर दीं भलाई

अपने अकेले ना खाईं मलाई।

सेवा जे करबऽ त नाम होय जाई

गरीब जनता के काम होय जाई

भटकल बा ओके आपन बनाईं
मुखिया जी तनी…………..।

घूस के बिना ही बना दऽ शौचालय

फूस के मड़इया करा दऽ शिवालय
मूरख बा ओकरा सिखा दीं पढ़ाई

मुखिया जी तनी……………..।

लाभ मनरेगा के सबके  देलाईं
जिये के हिसाब सबके सिखाईं
जीवन में उनका नऽ बारीं सलाई

मुखिया जी तनी……………… ।

सीओ बिडिओ के खुल के बतावऽ

पाकिट भरे के सब  रहता मेटावऽ

परदा जे बाटे अब ओकरा हटाईं

मुखिया जी तनी………………. ।

 

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/11/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/11/2018

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