अजब होय गया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

 

अजब होय गया रे भैया ये गजब होय गया
बेटवा निकला 420 देखो गजब होय गया।

बाप ना जाने छीना – छपटी, मैया ना जाने भेद
बाप बेचारा  बैठ कर रोये, माता करती खेद।
बेटवा झुकाबे सबका शीश, देखो गजब होय गया
अजब होय गया रे भैया………… ।

दिनभर करता है शैतानी, नहीं किसी से डरता
ले शिकायत घर जो आता, उससे भी वो लड़ता।
बेटवा नवाब का बना रईस, देखो गजब होय गया
अजब होय गया रे भैया …………………. ।

आता जाता नहीं है कुछ भी, फिर भी बनता हीरो
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू रहता,सबके नजर में जीरो।
बेटवा बाप से मांगे फीस, देखो गजब होय गया
अजब होय गया रे भैया…………………………. ।

कितना सुंदर गाँव था अपना , कितना सुंदर नाम
ऐसा बेटा जनम लिया क्यों , कर दिया बदनाम।
इसका कैसे करें तपतीस, देखो गजब होय गया
अजब होय गया रे भैया……………… ।

बूढ़े का ना रहा सहारा , किस्मत उसका है फूटा
रास ना आया जीना – मरना, भाग्य ने ऐसे लूटा।
बेटवा पर है आता खीस, देखो गजब होय गया
अजब होय गया रे भैया………………………. ।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/11/2018

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