सुकूं पाने की खातिर- शिशिर मधुकर

लाख चेहरे नज़र के सामने दुनियाँ में आते हैं
एक जलवे तेरे हमको यहाँ लेकिन सताते हैं

बड़ी उलझन सी होती है तू जैसे दूर रहता है
मुहब्बत करने वाले पीर दिल की पर छुपाते हैं

बड़ी जालिम है ये दुनिया चोट पे चोट देती है
सुकूं पाने की खातिर ही तुझे हम तो बुलाते हैं

तेरे आगोश में सुख के वो पल हैं आज भी जिंदा
लाख चाहा किया लेकिन वो हमसे ना भुलाते हैं

कभी रुसवा ना होगा तू यही वादा किया मधुकर
अपनी उन सारी बातों को हम अब भी निभाते हैं

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/11/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/11/2018

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